छत्तीसगढ़ चुनवा: कांग्रेस के पक्ष में 7-4?

छत्तीसगढ़ चुनवा: कांग्रेस के पक्ष में 7-4?
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छत्तीसगढ़ के 11 लोकसभा सीटों के लिए तीन चरणो में मतदान हुआ।पहले चरण में केवल नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर में वोटिंग हुई,दूसरे चरण में 3 सीटों में एवं बचे हुए 7 सीटों के लिए तीसरे चरण में वोटिंग हुई।

2014 के चुनाव में भाजपा को 10 सीट और कांग्रेस को केवल 1 सीट पर जीत मिली थी।पर इस चुनाव में हालात कुछ अलग है क्यूंकि हाल ही हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने एकतरफा जीत हासिल की है।

इस चुनाव में कांग्रेस कि चुनाव अभियान शुरुवात से जोड़ पकड़ी थी चाहे वो प्रत्याशी चयन में हो या चुनाव प्रचार में। भाजपा शुरुवात में कुछ पिछड़ी हुई सी लग रही थी क्यूंकि आलाकमान द्वारा सभी 10 सांसदो के टिकट काटे गए और सभी जगह नए प्रत्याशी चुनाव में लाए गये, पर जैसे जैसे चुनाव आगे बढ़ते गया, प्रधानमंत्री की रैली हुई, भाजपा का भी अभियान जोड़ पकड़ते गया।

वैसे देखा जाए तो छत्तीसगढ़ में सीधा मुकाबला प्रधानमंत्री के मोदी लहर और भूपेश बघेल सरकार के चार महीने के कार्यकाल के बीच है।बघेल सरकार ने आते ही जो जनता के लिए फैसले लिए है उनसे विशेषकर ग्रामीण जनता बहुत खुश है जैसे धान का समर्थन मूल्य में वृद्धि, बिजली बिल आधा आदि।

कांग्रेस ने जिस प्रकार विधानसभा चुनाव में एकतरफा जीत हासिल की थी और उनका बेहतर टिकट वितरण।दूसरी ओर भाजपा के कार्यकर्ताओ में हार की हताशा साथ में सभी सांसदों का टिकट कटना। तो चुनाव के शुरुआत में ऐसा लग रहा था कि कहीं कांग्रेस क्लीन स्वीप ना कर जाए।पर जैसे जैसे चुनाव आगे बढ़ता गया,हर सीट पर मुकाबला कांटे का हो गया। कई सीटों में कांग्रेस आगे दिखाई दी तो कहीं भाजपा तो कहीं 50-50 वाला मुकाबला दिखा।

बात पहले चरण से शुरू करे तो इसमें बस्तर सीट पर वोटिंग हुई।यह सीट पिछले 20 सालो से कश्यप परिवार का गढ़ रहा है।पर इस बार भाजपा ने कश्यप परिवार से टिकट काट दूसरे को दे दी। तो कश्यप परिवार का चुनाव में अच्छे से हिस्सा ना लेना साथ में इस बार बस्तर क्षेत्र में कांग्रेस थोड़ी मजबूत हुई है, तो कांग्रेस थोड़ी आगे लग रही है बस्तर लोकसभा में।

दूसरे चरण में प्रधानमंत्री के सभा के बाद थोड़ा माहौल बदला।इस चरण में राजनांदगांव,महासमुंद और कांकेर सीट पर मतदान हुआ।इस चरण में जातीय गोलेबंदी देखने को मिली,जैसे महासमुंद में साहू और साहू के बीच कड़ा मुकाबला हो गया 50-50 का। कांकेर लोकसभा में दोनो प्रत्याशी नए थे तो पूरा दारोमदार आलाकमान पर था पर आदिवासी क्षेत्रों में कांग्रेस की पकड़ बढ़ी है तो यहां से कांग्रेस आगे दिखी। राजनांदगांव में कांग्रेस का साहू उम्मीदवार होना उसका प्लस प्वाइंट है ,जो उन्हें दूसरे उम्मीदवार से आगे दिखा रहा।

तीसरे चरण के चुनाव आते आते भाजपा थोड़ी और मजबूत हुई। इस चरण में 7 सीटें रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, जांजगीर,सरगुजा,कोरबा और रायगढ़ में मतदान हुआ। दुर्ग लोकसभा में जातीय समीकरण के हिसाब से कुर्मी और कुर्मी के मुकाबले में भाजपा शहर में कांग्रेस से थोड़ी आगे दिखी, पर ग्रामीण क्षेत्रों में मुकाबला 50-50 का है।वैसा ही हाल रायपुर का भी है, यहां शहर में कांग्रेस थोड़ी आगे लग रही है पर ग्रामीण क्षेत्रों में कड़ा मुकाबला है। बिलासपुर सीट पर भी दोनो और से नए प्रत्याशी होने के कारण मुकाबला 50-50 का है। कोरबा सीट से जोगी परिवार के नाम खींच लेने से इस सीट में कांग्रेस थोड़ी मजबूत लग रही है। सरगुजा सीट में इस बार कांग्रेस मजबूत लग रही है मंत्री सिंहदेव के कारण।रायगढ़ और जांजगीर सीट पर इस बार कड़ा मुकाबला है, जांजगीर सीट पे हमेशा की तरह इस बार भी त्रिकोणीय संघर्ष देखने को मिलेगा क्योंकि बसपा का भी कुछ विधानसभा क्षेत्रों में व्यापक असर है।

कुल मिला कर इस बार छत्तीसगढ़ में बहुत ही कड़ा मुकाबला है।कई सीटों पर कांग्रेस तो कई पर बीजेपी आगे दिख रही।कुछ सीटों पर कांग्रेस को बढ़त(खासकर आदिवासी क्षेत्रों में) दिखने के कारण कांग्रेस थोड़ी आगे लग रही है। हर सीट पर मुकाबला कड़ा है, कई सीटों पर अनुमान लगाना ही मुश्किल है कि पलड़ा किधर भारी है।

मेरे विचार से इस बार छत्तीसगढ़ का स्कोर कार्ड 6-5 या 7-4 हो सकता है, जिसमे अगुवा कांग्रेस है।

रुद्र साहू हमारे छत्तीसगढ़ चुनाव भविष्यवाणी प्रतियोगिता के विजेता थे

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